Sunday, October 16, 2011

अनछुई सी तस्वीर

उस दिन जब से मैंने आँखें थी खोली,

तब से दिल ने भी कोई बात मुझसे न बोली,

अंदर ही अंदर जला जा रहा था,

राख बनकर मिटा जा रहा था,

एक परछाईं मुझे खींचती चली जा रही थी,

इतने उजाले में भी वो अंधेरों से मिली जा रही थी,

मैं उसके साथ जाऊँ न जाऊँ,

उस अंधेरे में समाऊँ या न समाऊँ,

हर कदम एक डर था,

जबसे तू मेरा रहगुज़र था,

इश्क़ का दलदल मुझे पल पल दफ़न कर रहा था,

हर सुबह हर रात मैं अपना क़त्ल जो कर रहा था,

वो अंधेरा भी मुझसे यही बताने आया था,

उजाला उस ओर नहीं जिस ओर मैं जा रहा था,

मंज़िल उस ओर नहीं जिस ओर मैं क़दम बढ़ा रहा था,

फिर हर सुबह की तरह रोया, शाम की तरह मुस्कुराया,

कि वो आज भी न आया था,

मैं तो बस यादें साथ लाया था,

फिर झुंझलाकर मैंने उसकी तस्वीर जला दी,

उसकी सूरत, उसकी राख मिट्टी में मिला दी,

पर उस शाम मैं रोया और सुबह मुस्कुराया,

उसकी तस्वीर “अनछुई” मेरे दिल में अब भी बाक़ी थी!!!!!!


Written on 29th July,2011 2:55 P.M.

This Is What It Takes

When I miss you, My eyes scream & drains, My heart cries & breaks, If this is what it takes, If this is what it takes, When I miss y...