Thursday, January 13, 2011

वक़्त

ये वक़्त गुज़रता जाएगा,
संसार बदलता जाएगा,
इस सफ़र में तू पहचान न खो,
हाथों से फिसलता जाएगा।


रास्ते में मिलेंगे कई साथी,
कोई साथ रहेगा, कोई साथ छोड़ जाएगा,
कोई दे जाएगा महकते लम्हे,
कोई ग़म देगा, कोई ग़म बाँट जाएगा।


कोई साथ का ही देगा धोखा,
कोई ताकेगा कोई मौका,
कोई दूर तक साथ निभाएगा,
कोई देकर ऐसी कोई शिक्षा,
भर देगा तुझमें प्रकाश,
कोई ज्ञान की बात सिखाएगा।


कोई तुझको ख़ुशियों से भरकर,
कोई हर एक बात पर हँसाकर,
तुझे मस्ती करना बतलाएगा,
कोई चाहेगा तेरी ख़ुशियाँ,
तुझे मुस्कुराता हुआ देखकर,
कोई दिल से ही मुस्काएगा।


मगर इसी सफ़र में एक ऐसा समय आएगा,
जब तेरा दिल भी किसी का साथ चाहेगा,
जिसकी ख़ुशियों के लिए तू मुस्कुराएगा,
जिसके ग़मों में तू आँखों से साथ निभाएगा,
जिसकी बातों से ही तेरा रोम-रोम खिल जाएगा,
जिसकी ख़ुशबू को तू साँसों में भरना चाहेगा,
ऐसी ही कुछ यादों को तू दिल से पिरोता जाएगा,
इन्हीं छोटी-मोटी बातों में एक साल निकल जाएगा।


ये वक़्त गुज़रता जाएगा,
संसार बदलता जाएगा...

Written on New Year's Eve 2010

चिक्की

मुझे तुम याद आती हो शाम की बहती हुई नदी की तरह सारे आकाश में फैली बादलों के बीच में तन्हाई समेटे हुए अंगड़ाई लेती हुई चेहरे पर उदासी की परत क...