साथ ही चले थे हमारे रास्ते जब से हमने थामे थे हाथ,
लेकिन वक़्त की अंगड़ाइयों के साथ मुझे पीछे छोड़ गए आप,
कहा था हर आँसू हर मुस्कान में देंगे तुम्हारा साथ,
फिर जाने क्यों मुँह मोड़ लिया, जाने क्या थी बात?
दोस्ती निभाई ऐसी कि दिल में भी हज़ारों सुराख़ कर दिए,
उनके ना निकले एक भी आँसू जो हमारे दामन में अंगारे रख कर चल दिए,
कितने ही दिन बीत गए हम उनकी एक हसीं मुस्कान के साथ जीते रहे,
वो हमारे दिल का दर्द बढ़ाकर हमारे आँसुओं से पौधे सींचते रहे.....
WRITTEN IN SEPTEMBER 2011
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