Saturday, April 14, 2012

कुछ सवाल तुम्हारे लिए

ये चाल है या कोई साज़िश हो रही है,
क्यों इन लम्हों के दरमियाँ हम दूर हो रहे हैं?
क्या तुम्हें नहीं लगता साथ बीते हुए पल हमें फिर से बुला रहे हैं?
ये क्यों हो जाता है, ये कैसे हो रहा है?
क्यों जो बातें हमें पास लाती थीं, दूर ले जा रही हैं?
क्या हमारा अभिमान हमारे रिश्ते को निगल रहा है?
क्या सवेरा शाम सा ही ढल रहा है?
क्या तुम्हारी ही ख़ुशी मेरी ख़ुशी नहीं थी?
क्या तुम्हारी ही हँसी मेरी हँसी नहीं थी?
हमारे रिश्ते में दूरियाँ कहाँ से आ रही हैं?
इन्हीं दूरियों में ग़लतफ़हमियाँ समा रही हैं....
क्या तुम्हें नहीं लगता हम अपने रास्ते बदल रहे हैं?
या कि लगता है नींद में करवट बदल रहे हैं?
सफ़र कैसा भी था हम बस आपके सहारे पर जी रहे हैं.....
क्यों तुम्हारी उम्मीद हमेशा मुझको रहती है?
तुम्हारा हाल जानकर ही साँसों में साँस बहती है....
तड़प दिल की निगाहों से बयान हम क्यों नहीं कर रहे हैं?
तुम्हारे लिए ही तो चेहरे पर इक हँसी सजा रखी है....
मुझे समझना ही मुश्किल है, समझ पाओगी तुम कैसे?
मेरा दिल भी न धड़का जब से तुम्हें देखा नहीं हँसते.....
जिस दिन मेरे इन सवालों का जवाब तुम दोगी,
उस दिन समझ लेना हम तुमसे दूर हो गए हैं....
लेकिन तुम्हारे साथ की आशा में हम क़यामत से जी रहे हैं....


WRITTEN ABOUT BROKEN RELATIONSHIP'S ...!!!

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