आवारापन की आदत है मुझको,
ये ज़िन्दगी भी अब आवारापन-सी लगने लगी है।
आवारा धड़कन है,
आवारा इस मन में तू,
आवारा-सी होकर तू भी,
इस दिल में भटकने लगी है।
आवारा ख़्वाहिश है,
आवारा-से संगीत में तू,
आवारा-सी होकर तू भी,
सरगम की तरह बजने लगी है।
आवारा दास्तान है,
आवारा-सा किरदार हूँ मैं,
आवारा-सा होकर मैं भी,
तेरी ही धुन पर बहकने लगा हूँ।
आवारा मेरी कश्ती है,
आवारा बनकर बहती है,
आवारा-सी होकर तू भी,
उसको सागर में भटकाने लगी है।
आवारा मन की नदी है,
आवारा बनकर बहती है,
आवारा-सी होकर तू भी,
इस मन की तपन छुपाने लगी है।
Written During A Journey On Train....
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