सताने से, बहाने से,
तू जो ना आई बुलाने से,
तो मेरा वादा है हमदम,
तेरी यादें बुला लूंगा।
मैं किस्सों से या बातों से,
तेरे हसीन ख़यालातों से,
ये मेरा वादा है हमदम,
तेरी महफ़िल सजा लूंगा।
मैं फूलों से या पत्तों से,
तेरे आँगन के पौधों से,
ये मेरा वादा है हमदम,
तेरा बिस्तर लगा लूंगा।
सज़ी बारिश की बूँदों से,
या अपने इन आँसुओं से,
ये मेरा वादा है हमदम,
तुझे जलधार ला दूंगा।
क़दम तेरे मोहब्बत से,
उठे होंगे जो चाहत से,
ये मेरा वादा है हमदम,
उन्हें मैं हर मकाम दूंगा।
मैं आँखों से या होठों से,
तेरी धड़कन धड़कने से,
ये मेरा वादा है हमदम,
तेरा दिल-ए-इश्क़ पा लूंगा...
No comments:
Post a Comment