भीनी भीनी सी महक आए,
तेरी बातों के संदेसे लाए,
जब हवा चले यूँही बलखाए,
अनजानी यादों को आए और छेड़ जाए,
के थोड़े बादल जब भी आते हैं,
खुले आकाश में नहाते हैं,
जब हम गीत कोई गाते हैं,
फिर हम पानी छपछपाते हैं,
तो तुम ऐसे मुस्कुरा जाती हो,
जैसे पल वो सज़ा जाती हो,
जब भी हमारी बातें कम पड़ जाती थीं,
हमारे बीच एक ख़ामोशी सी छा जाती थी,
तब हमारी धड़कनें ही आवाज़ करते हुए कुछ कहती थीं,
एक दूसरे की बाहों में फिर समा जाती थीं,
तब तुम ऐसे प्यार से देखती हो,
जैसे बातें कई बताना चाहती हो,
क्यों न अगले कुछ दिनों को,
हम इस तरह से सजाएँ,
कि अपनी आने वाली ज़िन्दगी में,
इन्हें कभी भी न भूल पाएँ।
आओ मिलकर साथ चलें,
कुछ लम्हों को बाँट लें...
WRITTEN IN MIDNIGHT OF FEBRUARY 14,2009
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