Tuesday, April 12, 2011

My First Poem - चंदा

चंदा ओ चंदा,
कभी पास तो आ,


आकर कभी,
कोई गीत गा,
जिसे ख़यालों में सुना है तुझे याद करके,


आकर कभी,
दो बातें कर,
जिन्हें सुनकर प्यार की बूँदों से मन भर जाए,
जिस आवाज़ की खनक से चेहरा खिल जाए,


आकर कभी,
कोई जादू कर,
जिससे मैं हर ख़ुशी हर ग़म से दूर हो जाऊँ,


इस कारवाँ से तेरी याद लिए,
उसी तरह मरूँ जैसे ईश्वर के चरणों में
चढ़ा कोई फूल सूख गया हो...




WRITTEN IN ELEVENTH STANDARD

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